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कमर्शियल सिलेंडर के लिए बदला नियम : बदला नियम, अब LPG सिलेंडर चाहिए तो पूरी करनी होगी ये शर्त, वरना सप्लाई बंद, PNG पर सरकार का इतना जोर क्यों, मकसद समझिए

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ईरान युद्ध के बाद से भारत में गैस सिलेंडर से जुड़े कई नियमों में बदलाव हो चुके हैं. सिलेंडर की रिफिलिंग से लेकर बुकिंग के नियम बदल गए हैं. रसोई गैस, कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं. अब सरकार ने सिलेंडर के जुड़े एक और नियम में बदलाव कर दिया है. LPG किल्लत के बीच दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडरों से जुड़े नियम में बदलाव कर दिया गया है. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी तभी मिलेगी, जब पाइप्‍ड नैचुरल गैस (PNG) के लिए अप्लाई कर लेगें.  

दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडरों के लिए पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया है. कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को ऑयल मार्केटिंग कंपनी (ओएमसी) के साथ रजिस्टर्ड करना होगा. जहां पीएनजी कनेक्शन का विकल्प मौजूद है, उन्हें आवेदन करना होगा. वहीं जहां फिलहाल पाइपलाइन नहीं पहुंचा है, वहां उन्हें औपचारिक वचन देना होगा कि, कनेक्शन पहुंचते ही वो पीएनजी पर स्विच करेंगे. पीएनजी के तेज डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के लिए इंद्रप्रस्‍थ गैस लिमिटेड (IGL) के साथ साझेदारी की जाएगी.  यानी कमर्शियल सिलेंडरों के लिए अब दुकानदारों,होटलों,रेस्टोरेंटों या फिर इंडस्ट्रियल यूजर्स को पहले खुद को तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ रजिस्टर् करना होगा. इसके साथ ही PNG कनेक्शन के लिए अप्लाई करना होगा.  बता दें कि बीते एक महीने में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में तीसरी बार बढ़ोतरी कर दी गई. 1 अप्रैल को फिर से 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए.

LPG के लिए मारामारी, पर PNG की मौज कैसे ?  

गैस संकट के बीच जहां LPG सिलेंडर की मारामारी देखी गई, वहीं PNG में कोई दिक्कत नहीं आई. दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत के लिए एनपीजी का सबसे बड़ा निर्यातक मिडिल ईस्ट रहा है. कुवैत, कतर से भारत सबसे ज्यादा एलपीजी का आयात करता है. वहीं नेचुरल गैस, जिससे पीएनजी तैयार होता है, उसके लिए खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, मोजाम्बिक जैसे देशों पर निर्भर है.

PNG पर क्यों जोर दे रही है सरकार 

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पीएनजी पर सरकार फोकस बढ़ा रही है. आयात की विविधता के अलावा इसका डिस्ट्रीब्यूशन भी आसान है. एलपीजी विदेशों से लाने के बाद उसे रेल मार्ग, सड़क मार्ग या फिर पाइपलाइन से सिलेंडर बोटलिंग प्लांट तक पहुंचाना पड़ता है. फिर वहां से ट्रांसपोर्ट कर उसे देश के अलग-अलग शहरों के गैस एजेंसियों के पास भेजना पड़ता है. वहां से डिलीवरी एजेंट आपके घर तक पहुंचाती है. वहीं दूसरी तरफ पीएनजी पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंच जाती है. सरकार ने पाइपलाइन कनेक्शन के नियमों में अभी ढील दी है. पहले इसके लिए मल्टीपल अप्रूवल, फीस और चार्ज देना पड़ता था, कई बार एक्सेस ऑफ लैंड का डिनायल भी आ जाता था, लेकिन सरकार ने अभी ये सारी बाधाएं दूर कर दी है.

पीएनजी कनेक्शन से सरकार का फायदा  

जितने लोग पीएनजी कनेक्शन में शिफ्ट होंगे, उसका फायदा सरकार को भी मिलेगा. वर्तमान में सरकार को एलपीजी सिलेंडर के उज्ज्वला कनेक्शन के तहत हर साल करोड़ों रुपये की सब्सिडी देनी पड़ती है. घरेलू सिलेंडर पर भी सब्सिडी देनी पड़ती है. जबकि पीएनजी कनेक्शन में ऐसी कोई सब्सिडी नहीं मिलती है, यानी सरकार इससे करोड़ों रुपये की बचत कर लेगी.  हालांकि बिल की बात करें तो LPG सिलेंडर के मुकाबले पीएनजी सस्ता होता है. बुकिंग, रिफिलिंग का झंझट नहीं होता.

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